2. 13 कुमाऊं रेजीमेंट के इन जवानों के लिए इन बर्फीली पहाड़ियों में बिना खास गर्म कपड़ों और बिना अच्छे खाने के हर दिन गुजारना भी एक युद्ध लड़ने जैसा ही था। इंडो चाइना वॉर को शुरू हुए कई हफ्ते बीत चुके थे और दूसरे मोर्चों पर घमासान जारी था। लेकिन रेजांग लॉ में अभी तक चाइना की तरफ से कोई सीधी कारवाई नहीं हुई थी। मेजर शैतान सिंह हर रोज सभी प्लटूंस का दौरा करते और जवानों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के लिए प्रेरित करते। इस दौरान दूसरे मोर्चों से आ रही युद्ध की खबरें यह जवान ऑल इंडिया रेडियो पर सुना करते थे। जैसे ही किसी मोर्चे पर चाइना के भारी पड़ने की खबर मिलती 13 कुमाओं के जवानों का खून खौल जाता। वो इसकी चर्चा अपने कमांडर मेजर शैतान सिंह से करते हुए कहते साहब जब हमें युद्ध का मौका मिलेगा तो हम जमकर लड़ेंगे। इस पर मेजर शैतान सिंह केवल मुस्कुरा देते। इसके बाद 17 नवंबर की रात यहां एक बर्फीला तूफान आया। उस तूफान के बाद फिजाओं में एक अजीब सी खामोशी थी। लेकिन इसी खामोशी में हजारों चीनी घुसपैठिए भी लगातार भारतीय सैनिकों के करीब बढ़ते जा रहे थे। अभी अगली सुबह का उजाला हुआ भी नहीं था कि चाइना की तरफ से कुछ हलचल शुरू हो गई। तीनों प्लेटून के जवानों ने जब अपने बैनोकुलस से नजरें दौड़ाई तो उन्हें कुछ किलोमीटर की दूरी पर चाइना की ओर से एडवांस वेपन और जवानों से खचाखच भरी 32 सैन्य गाड़ियां तेजी से रेजांग ला की ओर आती दिखी। जब तक भारतीय सैनिक कुछ समझ पाते, उससे पहले ही सुबह के 3:30 बजे चीन की तरफ से एक लंबा बॉस्ट आया जिसकी गूंज से पूरा पहाड़ी इलाका कांप उठा। मेजर शैतान सिंह को तुरंत बताया गया कि प्लेटून एट के सामने से दुश्मन का हैवी फायर आया है। ठीक 4 मिनट बाद नायब सूबेदार हरिराम ने भी उन्हें अपनी पोस्ट से रेडियो पर खबर दी कि करीब 30 चीनी सिपाही हमारी तरफ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इसके बाद मेजर शैतान सिंह ने अपने सभी जवानों को पोजीशन लेकर गोली चलाने का आदेश दे दिया। जैसे ही चाइनीस सोल्जर्स भारतीय जवानों की फायरिंग रेंज में आए, उन्होंने बिना देर किए उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दी। केवल 10 मिनट की गोलीबारी में कई चीनी सैनिक मारे गए और कई डर कर पीछे भाग गए। सबको लग रहा था कि पहला खतरा टल गया है। लेकिन असल में यह एक बड़े हमले से पहले की खामोशी थी। भारतीय जवान थोड़े रिलैक्स हुए ही थे कि तभी चाइना की तरफ से सीधा भारतीय पोस्ट के एक 3 इंच मोटार पर एक जोरदार बस्ट हुआ। एक ही झटके में मोटार तहस-नहस हो गया और तीन भारतीय जवान इसकी चपेट में आकर अपनी जान गवा बैठे। अपने तीन साथियों की शहादत की खबर ने मेजर शैतान सिंह को झकझोर कर रख दिया। उन्हें जल्द ही स्थिति का अंदाजा हो गया कि दुश्मन भारी मात्रा में एडवांस वेपंस के साथ आया है। उन्होंने तुरंत अपने सीनियर ऑफिसर को एक रेडियो मैसेज भेजा। प्लेजांग ला पर चीन की सेना हमला कर चुकी है। हमें तुरंत रीइंफोर्समेंट की जरूरत है। उनके इस संदेश पर दूसरी तरफ से जवाब आया इस वक्त रीइंफोर्समेंट मुमकिन नहीं है और आगे भी हम कोई मदद नहीं भेज पाएंगे। इसलिए बेहतर होगा आप अपने जवानों के साथ पोस्ट छोड़कर पीछे हट जाए। यानी इस मौके पर अगर मेजर शैतान सिंह चाहते तो वह अपनी और अपने जवानों की जान बचाने के लिए पोस्ट छोड़कर भाग सकते थे। 5. लास्ट मैन लास्ट राउंड यानी आखिरी आदमी अपनी आखिरी गोली तक युद्ध जारी रखेगा। क्योंकि प्लेटून से की पोजीशन रणनीतिक रूप से काफी अहम थी और यहां भारत की ओर से भारी नुकसान हो चुका था। इसलिए प्लेटून नाइन के जवानों को प्लेटून से की पोजीशन पर तैनात कर दिया गया। इस दौरान मेजर शैतान सिंह भी अपने साथी की शहादत के बाद खाली पड़े एलएमजी पोस्ट पर तैनात हो गए। उन्होंने वहां से दुश्मन को मुंहत तोड़ जवाब देना शुरू कर दिया। कुछ देर तक दोनों तरफ से अंधाधुंध फायरिंग होती रही क्योंकि यहां भारतीय फौज को कोई भी आर्म सप्लाई नहीं हुई थी इसलिए अब तेजी से जवानों की गोलियां खत्म हो रही थी। ऐसे में कुछ जवानों ने दुश्मन से हैंड टू हैंड कॉम्बैट शुरू कर दी। भारतीय सैनिक चीनियों को पहले अपने करीब आने देते और फिर उनके पास आते ही अपनी राइफलों के बेनेट से चीनियों पर टूट पड़ते। लेकिन चाइनीस सोल्जर्स के जैकेट्स इतने मोटे थे कि बेनेट का उन पर खास असर नहीं हो रहा था। ऐसे में अच्छे कद काठी के कुछ भारतीय जवानों ने उन्हें अपने शारीरिक बल से पछाड़ना शुरू कर दिया। इनमें से कई ऐसे थे जो सेना में भर्ती होने से पहले अपने गांव में कुश्ती लड़ते थे। लेंस नायक सिंह राम और उनके भाई नायक गुलाब सिंह भी पहलवान थे और युद्ध के मैदान में उनकी पहलवानी आज चीनियों के लिए जानलेवा साबित हो रही थी। दोनों भाई एक साथ दो-दो चीनियों को गर्दन से पकड़ कर आपस में टकरा देते और कभी उन्हें जमीन पर पटक कर धराशाही कर देते। इधर मेजर शैतान सिंह मोर्चे पर डटे हुए थे। वह बीच-बीच में दौड़-दौड़ कर अपने जवानों को मैदान में डटे रहने के लिए प्रेरित भी कर रहे थे। इस बीच उन्हें हाथ में गोली लग गई और एक चाइनीस स्प्लिंटर उनके कंधे को चीरता हुआ निकल गया। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और पट्टी करवा कर दोबारा युद्ध मैदान में आ धमके। कुछ देर बाद उनका हाथ इतना ज्यादा डैमेज हो गया कि वो ठीक से राइफल भी नहीं चला पा रहे थे। इसलिए उन्होंने रस्सी के सहारे मशीन गन को पैरों में बांध लिया और चीनी सैनिकों पर गोलियां बरसाने लगे।4. अक्सर चाइना की तरफ से एक बड़ा हमला आता दिख रहा है। लगभग 400 दुश्मन सैनिक तेजी से हमारी ओर बढ़ रहे हैं। कुछ ही देर में प्लेटून एट से भी सूचना आई कि चोटी की तरफ से करीब 800 चीनी सैनिक उनकी तरफ भी आ रहे हैं। चाइना की ओर से यह दिन का तीसरा और फुल फ्रंटल अटैक था। भारतीय सैनिकों ने भी अपनी-अपनी पोजीशन से मोर्चा संभाल लिया। मेजर शैतान सिंह ने अपने जवानों को इस बार केवल राइफल से ही नहीं बल्कि लाइट मशीन गंस, मोटार और ग्रेनेड से भी जवाब देने का आदेश दिया। उन्होंने लगातार घटते एमुनेशन को देखते हुए जवानों को सख्त निर्देश दिया कि एक भी गोली बर्बाद नहीं होनी चाहिए। फायर तभी किया जाए जब दुश्मन उनकी रेंज में हो। भारतीय जवानों ने इस बार भी इतनी बहादुरी और सटीकता से चीनी सिपाहियों का सामना किया कि कुछ ही मिनटों के अंदर कई चाइनीस सोल्जर्स मारे गए और बाकियों को एक बार फिर पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन इस बार चीनी सैनिकों को फिर से हमला करने के लिए एकजुट होने में ज्यादा समय नहीं लगा। बार-बार के नाकाम हमलों के बाद चीन के सैनिकों ने इस बार अपनी प्लानिंग में बदलाव किया। छोटे-छोटे हमले करके वो पहले ही भारतीय सैनिकों के पास मौजूद एमुनेशन के एक बड़े भाग को खत्म करवा चुके थे। और जहां अब तक चीन के सैकड़ों सैनिक मारे गए थे, तो वहीं भारत की तरफ से दर्जनों जवान शहीद हो गए थे। ऐसे में जैसे ही उन्हें भारत की ओर से गोलीबारी कम होती दिखी, उन्होंने इस बार चोटियों की आड़ लेकर भारतीय जवानों पर गोलीबारी की जगह मोटार फायरिंग शुरू कर दी। दोनों तरफ से भयंकर गोलीबारी होने लगी। रात के अंधेरे में ऊंचाई पर होने की वजह से भारतीय जवानों को दुश्मन के निशाने से बचने में मदद मिल रही थी। लेकिन जैसे ही सुबह के 6:25 हुए, चारों तरफ हल्का-हल्का उजाला होने लगा। इस रोशनी की वजह से भारतीय पोस्ट और उनके हथियारों की पोजीशनिंग, दुश्मन को दूर से ही साफ-साफ दिखने लगी। इसके बाद चाइनीस सोल्जर्स ने ना केवल मोटार से गोलीबारी की बल्कि वह बीच-बीच में भारतीय जवानों पर आरसीएल बम भी फेंक रहे थे। इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही देर में भारत की मोटार पोस्ट बुरी तरह से बर्बाद हो गई। प्लेटून से और प्लेटून एट जो फ्रंट पर थी उनके काफी जवान देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए जो जिंदा बचे थे वो गंभीर रूप से घायल थे। ऐसे हालात में मेजर शैतान सिंह ने अपने बचे हुए जवानों को एक ऑपरेशनल ऑर्डर दिया।
